S Jaishankar Vs Pakistan Terrorism; IIT Madras Speech | Global Democracy | एस जयशंकर बोले- दुर्भाग्य से हमारे पड़ोसी बुरे हैं: आतंकवाद से बचने के लिए जो भी करना होगा हम करेंगे, अच्छे पड़ोसी की भावना नहीं

Ziddibharat
4 Min Read

IIT मद्रास के कार्यक्रम शास्त्र 2026 में बोलते विदेश मंत्री एस जयशंकर।

तमिलनाडु के IIT मद्रास में शुक्रवार को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं, दुर्भाग्य से, हमारे हैं। अगर कोई देश यह तय करता है कि वह जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रखेगा, तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि हम उस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम पर निर्भर है। कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। हम खुद को बचाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वह करेंगे।

विदेश मंत्री ने कहा कि कई साल पहले हमने पानी बांटने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी, लेकिन अगर दशकों तक आतंकवाद होता है, तो अच्छी पड़ोस की भावना नहीं रहती। जयशंकर ने इससे पहले IIT मद्रास के कार्यक्रम शास्त्र 2026 का उद्घाटन भी किया।

बांग्लादेश पर कहा- अच्छे लोग नुकसानदायक नहीं

बांग्लादेश में अशांति पर विदेश मंत्री ने कहा- मैं अभी दो दिन पहले बांग्लादेश में था। मैं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गया था। हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं। अगर आपका कोई पड़ोसी आपके लिए अच्छा है या कम से कम आपके लिए नुकसानदायक नहीं है।

जब आप अपने पड़ोस में देखते हैं, जहां भी अच्छे पड़ोसी होने की भावना होती है, भारत निवेश करता है, भारत मदद करता है, भारत शेयर करता है।

विदेश मंत्री की 5 मुख्य बातें…

  • भारत दुनिया की उन बहुत कम पुरानी सभ्यताओं में से है, जो आज एक आधुनिक राष्ट्र-राज्य के रूप में मौजूद हैं। भारत को अपने इतिहास और विरासत का स्पष्ट एहसास है, जो बहुत कम देशों में देखने को मिलता है।
  • भारत ने जानबूझकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया, जिससे लोकतंत्र एक वैश्विक राजनीतिक विचार बना। भारत की जिम्मेदारी है कि वह अपने विचार, संस्कृति और इतिहास को दुनिया के सामने रखे।
  • पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी जरूरी है और यह साझेदारी सकारात्मक तरीके से की जा सकती है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का अर्थ है कि भारत ने दुनिया को कभी दुश्मन या खतरे के रूप में नहीं देखा।
  • सीमित संसाधनों के बावजूद ज्यादा प्रभाव कैसे डाला जाए, यही भारत की विदेश नीति की सोच है। भारतीय कूटनीति अपनी ताकत, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संस्थानों का उपयोग करके समाधान तलाशती है।
  • वैक्सीन डिप्लोमेसी का भावनात्मक असर बहुत गहरा रहा। कई देशों में पहली वैक्सीन खेप मिलने पर लोगों की आंखों में आंसू थे। COVID के दौरान कई विकसित देशों ने जरूरत से ज्यादा वैक्सीन जमा कर ली थी।
  • छोटे और गरीब देशों के लिए भारत की वैक्सीन मदद “जीवनरेखा” जैसी थी। भारत दुनिया के सबसे कुशल वैक्सीन उत्पादकों में से एक है। वैश्विक सप्लाई चेन भारत के बाहर से आती है, इसलिए दुनिया के साथ सहयोग जरूरी है।

—————-

ये खबर भी पढ़ें…

जयशंकर ने पाकिस्तानी संसद के स्पीकर से हाथ मिलाया:खालिदा जिया के फ्यूनरल में पहुंचे थे; ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्रिकेटर्स ने हाथ नहीं मिलाया था

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ढाका में पाकिस्तानी संसद के स्पीकर अयाज सादिक से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया। दोनों बांग्लादेश की पूर्व पीएम खालिदा जिया के फ्यूनरल में 31 दिसंबर को पहुंचे थे।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *