गिग-वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी के ड्राफ्ट रूल्स जारी: 90 दिन काम करने पर हेल्थ-इंश्योरेंस और एक्सीडेंट बेनिफिट्स मिलेंगे; आधार से रजिस्ट्रेशन होगा

Ziddibharat
7 Min Read

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए बनाया गया था।

केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत ड्राफ्ट रूल्स नोटिफाई कर दिए हैं। इनमें रजिस्ट्रेशन, एलिजिबिलिटी और बेनिफिट्स की डिटेल्स दी गई हैं। एक साल में कम से कम 90 दिन काम करने पर वर्कर्स को फायदा मिलेगा।

रजिस्ट्रेशन कैसे होगा?

16 साल से ऊपर के सभी गिग वर्कर्स को आधार नंबर से रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। एग्रीगेटर्स जैसे स्विगी, जोमैटो, उबर आदि को वर्कर्स की डिटेल्स सेंट्रल पोर्टल पर शेयर करनी होंगी।

इससे यूनिवर्सल अकाउंट नंबर या यूनिक आईडी जनरेट होगी। रजिस्टर्ड वर्कर्स को डिजिटल या फिजिकल आईडेंटिटी कार्ड मिलेगा, जिसमें फोटो और डिटेल्स होंगी। ये कार्ड पोर्टल से डाउनलोड कर सकते हैं।

एलिजिबिलिटी की क्या शर्तें हैं?

बेनिफिट्स लेने के लिए पिछले फाइनेंशियल ईयर में एक एग्रीगेटर के साथ कम से कम 90 दिन या कई एग्रीगेटर्स के साथ 120 दिन काम करना जरूरी है। हर दिन कमाई होने पर काउंट होगा, चाहे कितनी भी हो।

अगर एक दिन कई प्लेटफॉर्म्स पर काम किया तो अलग-अलग काउंट होगा, जैसे तीन एग्रीगेटर्स पर एक दिन काम तो तीन दिन माने जाएंगे। 60 साल की उम्र पूरी होने या लगातार 90-120 दिन काम न करने पर एलिजिबिलिटी खत्म हो जाएगी।

कौन-कौन से बेनिफिट्स मिलेंगे?

एलिजिबल वर्कर्स को हेल्थ इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस मिलेगा। एग्रीगेटर्स से कंट्रीब्यूशन लेकर अलग सोशल सिक्योरिटी फंड बनाया जाएगा। सेंट्रल गवर्नमेंट एक ऑफिसर या एजेंसी अपॉइंट करेगी जो कंट्रीब्यूशन कलेक्ट करेगी।

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 में पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को डेफाइन किया गया था। अब इन ड्राफ्ट रूल्स से प्रैक्टिकल इंप्लीमेंटेशन हो रहा है। गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें डिलीवरी, राइड शेयरिंग जैसे काम शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स को भी सिक्योरिटी मिले।

ड्राफ्ट रूल्स पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगे

ड्राफ्ट रूल्स पर स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगे गए हैं। नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग वर्कर्स के 5 मेंबर्स नॉमिनेट किए जाएंगे, जो रोटेशन पर रहेंगे। बोर्ड वर्कर्स की संख्या का अनुमान लगाएगा और नई स्कीम्स सजेस्ट करेगा। फाइनल रूल्स आने के बाद ये लागू हो सकते हैं।

वर्कर्स को क्या करना चाहिए?

अगर आप गिग वर्कर हैं तो जल्दी रजिस्ट्रेशन कराएं और डिटेल्स अपडेट रखें। एड्रेस, मोबाइल नंबर या स्किल चेंज होने पर पोर्टल पर बताएं, वरना बेनिफिट्स रुक सकते हैं। ये रूल्स लाखों डिलीवरी बॉयज, ड्राइवर्स और फ्रीलांसर्स के लिए फायदेमंद होंगे।

25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी।

25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी।

स्विगी-जोमैटो ने इंसेंटिव का ऐलान किया था

2 दिन पहले देशभर में गिग वर्कर्स यानी डिलीवरी पर्सन्स की हड़ताल के बीच स्विगी और जोमैटो ने पीक ऑवर्स और ईयर-एंड डेज पर ज्यादा इंसेंटिव देने का ऐलान किया था। जोमैटो ने डिलीवरी पार्टनर्स को मैसेज भेजकर बताया कि पीक ऑवर्स (शाम 6 से रात 12 बजे) में हर ऑर्डर ₹120-150 पेआउट मिलेगा।

दिन भर में ऑर्डर की संख्या और अवेलेबिलिटी के हिसाब से ₹3,000 तक कमाई का वादा किया गया है। स्विगी ने कहा की डिलीवरी वर्कर्स 31 दिसंबर और 1 जनवरी मिलाकर ₹10,000 तक कमा सकते हैं। न्यू ईयर ईव पर पीक ऑवर्स (शाम 6 से रात 12 बजे) में ₹2,000 तक कमाई कर सकते हैं।

25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी

31 दिसंबर को देशभर के गिग वर्कर्स की हड़ताल होने वाली थी, जिसमें करीब 1 लाख वर्कर शामिल होने वाले थे। हालांकि, इंसेंटिव के ऐलान के बाद यह हड़ताल नहीं हुई। यूनियन का आरोप था कि जोमैटो-स्विगी जैसी कंपनियां उनका शोषण कर रही हैं और उन्हें बेसिक कानूनी अधिकार नहीं मिल रहे हैं।

यूनियन ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका असर देश की इकोनॉमी की ग्रोथ पर भी पड़ेगा। वहीं 25 दिसंबर को डिलीवरी वर्कर्स ने सांकेतिक हड़ताल की थी। इसमें लगभग 40,000 वर्कर्स शामिल हुए थे।

गिग वर्कर्स की हड़ताल की 5 वजह थीं

डिलीवरी पार्टनर्स और राइडर्स की हड़ताल के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही कई शिकायतें थीं। यूनियन नेताओं और एक्सपर्ट्स के मुताबिक मुख्य कारण ये हैं:

1. सोशल सिक्योरिटी और वेलफेयर फंड का अभाव

गिग वर्कर्स की सबसे बड़ी मांग सामाजिक सुरक्षा है। सरकारी नियमों के बावजूद, कई राज्यों में अभी तक इन वर्कर्स को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा या पीएफ (PF) जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

2. गिरती हुई कमाई और इंसेंटिव में कटौती

शुरुआत में कंपनियां डिलीवरी पार्टनर्स को ज्यादा इंसेंटिव देती थीं। उनमें अब कटौती की गई है। पहले प्रति ऑर्डर ₹40 से ₹60 मिलते थे। अब यह घटकर ₹15 से ₹25 के बीच रह गया है।

3. खराब वर्किंग कंडीशन और 10-मिनट डिलीवरी का दबाव

क्विक कॉमर्स एप्स जैसे ब्लिंकिट, जेप्टो में 10-12 मिनट में डिलीवरी करने का दबाव रहता है। वर्कर्स का आरोप है कि इस चक्कर में उनके एक्सीडेंट होने का खतरा बढ़ गया है।

4. मनमाने तरीके से आईडी (ID) ब्लॉक करना

गिग वर्कर्स की एक बड़ी शिकायत यह है कि कंपनियां बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण के उनकी आईडी ब्लॉक कर देती हैं। इससे उनका रोजगार अचानक छिन जाता है।

5. गिग वर्कर का कानूनी दर्जा

फिलहाल इन वर्कर्स को कंपनियों का ‘पार्टनर’ कहा जाता है, ‘कर्मचारी’ नहीं। हड़ताल के जरिए ये मांग की जा रही है कि उन्हें औपचारिक कर्मचारी माना जाए।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *